बिना इन्टरनेट विश्व के कीसी भी हिस्से में बसे ईन्सान से कैसे करते है बात आए जानते है इस पोस्ट मे...

जानिए इस टेक्नोलॉजी के बारे मैं वेस्ट इन्डिया रिजीयोनल जोन के को-ओर्डिनेटर और राजकोटीयन राजेश वागडिया से...


इन्टरनेट के बिना आज कीसी भी कौने में बसे ईन्सान से बात करना मुमकिन हो पाया है। लेकिन आपातकाल की परिस्थिति, जब इन्टरनेट या मोबाइल भी काम नहीं आता उस वक्त सिर्फ़ एक चीज काम आ सकती हैं और वह है हेम रेडियो। गुजरात के राजकोट में रहने वाले और कई स्कूल-कॉलेज में हैम रेडियो के अनुभव और प्रयोग के बारे में लेक्चर दे चूके हेम राजेश वागडिया ने हेम की उपयोगिता से जुडी कई बातें शेर की है। इतना हीं गुजरात में हैम के जरिए डिजिटल कम्युनिकेशन सैटेलाइट की शुरुआत करने वाले वह प्रथम हेम है।


हेम रेडियो को एमेच्योर रेडियो भी कहां जाता है और हेम ऑपरेटर को 'हेम' कहाँ जाता है, जो की प्रोफेशनल न होते हुए भी प्रोफेशनल जैसी ही काबिलियत रखते है। हेम रेडियो को एक होबी के तौर पर देखा जाता है और उसका इस्तेमाल वितीय लाभ के लिए नहीं किया जा सकता।

टेक्स्ट मेसेज भी है आसान :

हैम को लैपटॉप या टेबलेट के साथ कनेक्ट करके बिना मोबाइल नेटवर्क के हम दूसरे हैम के साथ डिजिटल कम्युनिकेशन यानी के चैट कर सकते है, हालांकि सामने वाले हैम के पास भी सभी जरूरी सोफ्टवेयर होना जरूरी है।

अप्रैल में किया सैटेलाइट लॉन्च :

राजेश AMSAT INDIA वेस्ट इंडिया रिजीयोनल जोन के कोर्डिर्नेटर भी है। उसकी संस्था के सभी सदस्योने अप्रैल 2019 में एक सैटेलाइट बनाया था। जीसे खुद ISRO ने लॉन्च कीया है। इतना हो नहीं 2005 में भी एक ऐसा ही सैटेलाइट AMSAT INDIA द्वारा लॉन्च किया गया था।

ISS की चेलेन्ज में भी हुए पास :

इन्डियन स्पेस स्टेशन के द्वारा समय-समय पर हेम ऑपरेटर को चेलेन्ज कीया जाते है। जिसमें राजेश ने ISS द्वारा भेजी तस्वीर को केप्चर कीया था। राजेश ने बताया की, पिक्चर यानी तस्वीर को सबसे पहले साउन्ड में कन्वर्ट कीया जाता है और उसे ट्रान्समीट करते है तस्वीर मिल जाती है।

एस्ट्रोनॉट से की थी बातचीत :


राजेश की तरह उनके दोनों बच्चे भी हेम है। जी, हाँ साल 2012 में एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स से गुजरात के 15 बच्चो को हेम के जरिए बातचीत करने का मौका मिला था। जिसमें राजेश की बेटी साक्षी भी शामिल थी।

एक पुस्तक ने दी प्रेरणा :

राजेश को हेम ऑपरेटर बनने की प्रेरणा कैसे मिली यह पूछते ही उन्होंने जवाब दिया की, "में जब 8वीं कक्षा में था, तब 'स्कोप' नाम के एक पुस्तक में हेम रेडियो के बारे में विस्तृत पढा, इतना ही नहीं हेम रेडियो की परीक्षा से लेकर उसके लायन्स तक सब कुछ काफी रोचक लगा। बाद में मैंने साल 1991 में 18 साल की उम्र में एक साथ हेम की दो परीक्षा पास कर ली। हालांकि की उस वक्त लायन्स मिलने में हीं पांच साल लग गए ।"

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